Dr. Jitesh Jain | MBBS, MS Orthopedics, FNB (Sports Medicine and Arthroscopy) | Consultant at Rajasthan Hospital, Jaipur
डॉ. जितेश जैन का यह केस दैनिक भास्कर, जयपुर (11 जून 2026) में प्रकाशित हुआ है।
जयपुर के राजस्थान हॉस्पिटल में एक 60 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का जटिल घुटना प्रत्यारोपण (नी-रिप्लेसमेंट) रोबोटिक तकनीक की मदद से सफलतापूर्वक किया गया। खास बात यह रही कि यह सर्जरी पुरानी प्लेट को निकाले बिना की गई। मरीज पिछले लगभग 10 साल से चलने-फिरने में असमर्थ थे और अब सर्जरी के बाद दोबारा अपने पैरों पर चल पा रहे हैं। इस केस को ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. जितेश जैन ने अंजाम दिया।
केस क्या था: 10 साल की तकलीफ का हल
मरीज को कई साल पहले पैर में फ्रैक्चर हुआ था, जिसके इलाज के दौरान हड्डी में प्लेट और स्क्रू लगाए गए थे। समय के साथ यही प्लेट और स्क्रू हड्डी में पूरी तरह जाम हो गए, यानी हड्डी के साथ इतने मजबूती से जुड़ गए कि उन्हें निकालना बेहद मुश्किल हो गया। इसके साथ ही घुटने की गंभीर समस्या और पैर के टेढ़ेपन ने चलना-फिरना लगभग बंद कर दिया था। डॉ. जितेश जैन के अनुसार, प्लेट को निकाले बिना सामान्य तरीके से नी-रिप्लेसमेंट करना आसान नहीं था, इसी वजह से यह सर्जरी लंबे समय से टल रही थी।
यह केस इतना जटिल क्यों था
घुटना प्रत्यारोपण में सर्जन को हड्डी का सही माप लेकर इम्प्लांट को बिल्कुल सटीक एंगल पर बैठाना होता है। लेकिन जब हड्डी में पहले से कोई पुरानी प्लेट जाम हो, तो माप लेना और इम्प्लांट को सही जगह फिट करना और भी कठिन हो जाता है। आमतौर पर ऐसे मामलों में पहले एक अलग सर्जरी कर प्लेट निकाली जाती है, फिर हड्डी के ठीक होने का इंतज़ार किया जाता है, और उसके बाद नी-रिप्लेसमेंट होता है। इसका मतलब है दो बड़ी सर्जरी, ज्यादा दर्द और लंबी रिकवरी। इस मरीज के मामले में प्लेट निकालना ही संभव नहीं था, इसलिए एक बेहतर रास्ता चाहिए था।
रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट ने कैसे रास्ता बनाया
इस जटिल स्थिति में राजस्थान हॉस्पिटल में उपलब्ध क्यूविस (CUVIS) रोबोटिक सिस्टम की मदद से सर्जरी की गई। रोबोटिक तकनीक में सर्जरी से पहले मरीज के घुटने का 3डी डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है, जिससे हड्डी की हर जरूरी माप पहले से तय हो जाती है। इसी प्लानिंग के आधार पर डॉ. जितेश जैन ने मरीज के टेढ़े पैर को सीधा करते हुए पुरानी प्लेट को बिना निकाले ही, बेहद सटीक तरीके से घुटना प्रत्यारोपण किया। रोबोटिक गाइडेंस की वजह से कटाई सीमित और सटीक रही, जिससे आसपास की स्वस्थ हड्डी और टिश्यू को कम नुकसान पहुंचा।
रोबोटिक तकनीक के मुख्य फायदे
रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट सामान्य सर्जरी की तुलना में कई मायनों में बेहतर मानी जाती है:
- इम्प्लांट की सटीक फिटिंग, जिससे घुटना ज्यादा प्राकृतिक तरीके से काम करता है।
- हड्डी की कम कटाई और कम खून बहना।
- जटिल मामलों में भी, जैसे पुरानी प्लेट या पैर के टेढ़ेपन में, बेहतर नियंत्रण।
- आमतौर पर तेज रिकवरी और जल्दी चलना-फिरना शुरू।
- इम्प्लांट की लंबी उम्र की बेहतर संभावना।
किन मरीजों के लिए उपयोगी है
यह तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए मददगार है जिनके घुटने में गंभीर गठिया (अर्थराइटिस) है, जिनका पैर टेढ़ा हो गया है, या जिनकी हड्डी में पहले से कोई प्लेट, स्क्रू या इम्प्लांट लगा हुआ है। ऐसे जटिल मामलों में, जहां सामान्य सर्जरी में जोखिम ज्यादा होता है, रोबोटिक गाइडेंस सटीकता बढ़ा देती है। अगर आप या आपके परिवार में कोई लंबे समय से घुटने के दर्द के कारण चलने-फिरने में परेशानी झेल रहा है, तो एक बार विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
सर्जरी के बाद रिकवरी
रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट के बाद ज्यादातर मरीज सर्जरी के एक से दो दिन के भीतर सहारे के साथ चलना शुरू कर देते हैं। शुरुआती कुछ हफ्तों में फिजियोथेरेपी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि इससे घुटने की ताकत और लचीलापन तेजी से लौटता है। पूरी तरह सामान्य गतिविधियों में लौटने में आमतौर पर कुछ हफ्ते से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं, जो मरीज की उम्र, सेहत और केस की जटिलता पर निर्भर करता है। इस मरीज के मामले में सर्जरी के बाद राहत मिली और वे दोबारा चलने में सक्षम हो गए।
डॉ. जितेश जैन के बारे में
डॉ. जितेश जैन जयपुर के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, जो रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट, एसीएल सर्जरी, आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन में विशेषज्ञता रखते हैं। वे राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में कंसल्टेंट हैं और जटिल घुटना प्रत्यारोपण मामलों में अनुभव रखते हैं। रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट और घुटना प्रत्यारोपण से जुड़ी और जानकारी के लिए आप उनकी वेबसाइट देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या पुरानी प्लेट निकाले बिना नी-रिप्लेसमेंट संभव है?
हां, कुछ जटिल मामलों में रोबोटिक तकनीक की मदद से पुरानी प्लेट को निकाले बिना भी सटीक नी-रिप्लेसमेंट संभव है, जैसा इस केस में किया गया। यह निर्णय जांच और मरीज की स्थिति देखकर सर्जन लेते हैं।
रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट सामान्य सर्जरी से कैसे अलग है?
रोबोटिक सर्जरी में पहले से 3डी प्लानिंग की जाती है और इम्प्लांट को सटीक एंगल पर बैठाया जाता है, जिससे हड्डी की कटाई कम होती है और रिकवरी आमतौर पर तेज रहती है।
क्या रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट सुरक्षित है?
जी हां, अनुभवी सर्जन के हाथों यह तकनीक सुरक्षित मानी जाती है। रोबोटिक गाइडेंस सटीकता बढ़ाती है, जिससे जटिल मामलों में जोखिम कम होता है।
सर्जरी के बाद चलने में कितना समय लगता है?
ज्यादातर मरीज एक से दो दिन में सहारे के साथ चलना शुरू कर देते हैं। पूरी रिकवरी कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक हो सकती है, जो केस पर निर्भर करता है।
जयपुर में रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट कहां कराएं?
डॉ. जितेश जैन राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट करते हैं। सलाह के लिए आप सीधे WhatsApp पर संपर्क कर सकते हैं।
निष्कर्ष
यह केस दिखाता है कि सही तकनीक और अनुभवी हाथों से सबसे जटिल समस्या का भी हल निकल सकता है। 10 साल से चलने में असमर्थ मरीज का दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना इसका सबूत है। अगर आप लंबे समय से घुटने के दर्द से परेशान हैं या आपको किसी ने जटिल केस बताकर सर्जरी से मना किया है, तो एक बार डॉ. जितेश जैन से सलाह जरूर लें।